सावधानी ही लू से बचने का बेहतर उपाय - डॉ. शुभम भेंडारकर


अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट 

रायपुर - गर्मी के मौसम में चलने वाली बेहद गर्म और सूखी हवा को ‘लू’ कहते हैं। जब तापमान बहुत ज्यादा हो और हवा में नमी कम हो , तो लू चलती है। यह शरीर पर बुरा असर डाल सकती है। लू लगना यानि हीट स्ट्रोक (Heat Stroke) — एक ऐसी स्थिति जिसमें शरीर का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और शरीर के अंदर का कूलिंग सिस्टम काम करना बंद कर देता है। समय पर ईलाज ना हो तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। क्षेत्र में लगातार बढ़ते तापमान और तेज धूप के कारण लू (Heat Stroke) और शरीर में पानी की कमी के मामले बढ़ने लगे हैं। जब हम अधिक देर तक तेज़ धूप में रहते हैं या शरीर में पानी की कमी हो जाती है , तो शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं रह पाता। शरीर पसीने के माध्यम से तापमान को संतुलित करता है , लेकिन पानी की कमी के कारण यह प्रक्रिया रुक जाती है और शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है। यही स्थिति लू या हीट स्ट्रोक कहलाती है। इस संबंध में चिकित्सक डॉ . शुभम भेंडारकर ने बताया कि तेज़ धूप में लम्बे समय तक रहने , शरीर में पानी और नमक की कमी होने , बहुत गर्म और उमस भरे मौसम में बाहर निकलने , पर्याप्त मात्रा में पानी ना पीने ,  अत्यधिक शारीरिक श्रम करने और गर्म , गहरे रंग के टाईट कपड़े पहनने से लू लग सकता है। उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी होने से चक्कर आना , कमजोरी , उल्टी , तेज बुखार और बेहोशी जैसी समस्यायें हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से बच्चे , बुजुर्ग , गर्भवती महिलायें , दिल और हाई बीपी के मरीज और धूप में काम करने वाले लोगों जैसे मजदूर , यात्रि , रेहड़ी वाले , ट्रैफिक पुलिस को ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने सलाह दी है कि  गर्मी में तली-भुनी और भारी चीजों की बजाय हल्का भोजन करें। मौसमी फल जैसे तरबूज , खीरा , ककड़ी ज्यादा खायें। यह शरीर को हाइड्रेट रखते हैं। सभी लोग दिन भर पर्याप्त मात्रा में पानी पियें और दोपहर बारह बजे से शाम चार बजे तक तेज धूप में बाहर निकलने से बचें। खाली पेट धूप में बाहर ना जायें तथा बाहर निकलते समय सिर को कपड़े , टोपी या छाते से ढककर रखें तथा हल्के और सूती कपड़े पहनें। पूरी बांह के कपड़े पहनें और नंगे पैर बाहर ना निकलें। इसके अलावा नींबू पानी , छाछ , नारियल पानी या ओआरएस जैसे तरल पदार्थों और खीरा , ककड़ी ,खरबूजा , संतरा , तरबूज का सेवन करना भी शरीर को हाइड्रेट रखने में सहायक होता है। ये ना सिर्फ शरीर को ठंडा रखते हैं , बल्कि पानी की कमी भी पूरी करते हैं। डॉ. शुभम ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति में तेज सिर दर्द , तेज बुखार , चक्कर , अत्यधिक प्यास , उल्टी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत ठंडी और छायादार जगह पर लिटाकर पानी या ओआरएस देना चाहिये तथा जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करना चाहिये। उन्होंने आम नागरिकों से अपील करते हुये कहा है कि इस गर्मी को सेहतमंद बनायें – खुद भी सुरक्षित रहें और अपनों को भी सुरक्षित रखें। इस जानकारी को अपने दोस्तों और परिवार के साथ ज़रूर साझा करें , क्योंकि थोड़ी सी जागरूकता किसी की जान बचा सकती है। अपने दो टूक स्पष्ट संदेश में डॉ. शुभम भेंडारकर  जोर देते हुये कहा कि  थोड़ी सी सावधानी अपनाकर गर्मी और लू से होने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है।

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