सारंगढ़ प्रांजल दिव्यांग विशेष स्कूल में मनाया गया अंतरराष्ट्रीय पीड़ित बाल दिवस, बच्चों को दी गई सुरक्षा की सीख ....

सारंगढ। जिला मुख्यालय सारंगढ़ स्थित प्रांजल दिव्यांग विशेष स्कूल में आज 'आक्रामकता के शिकार हुए मासूम बच्चों का अंतरराष्ट्रीय दिवस' सामाजिक कार्यकर्ता एवं संस्था प्रमुख श्रीमती हिरा देवी निराला के मार्गदर्शन और विशेष शिक्षक प्रांजल की उपस्थिति में यादगार तरीके से मनाया गया। 
*कार्यक्रम का शुभारंभ*  
कार्यक्रम की शुरुआत युद्ध, हिंसा, शोषण और तस्करी का शिकार हुए दुनिया भर के मासूम बच्चों को श्रद्धांजलि देकर की गई। बच्चों और स्टाफ ने 2 मिनट का मौन रखकर पीड़ित बच्चों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। 
संस्था प्रमुख का संदेश
इस अवसर पर संस्था प्रमुख श्रीमती हिरा देवी निराला ने कहा, "दिव्यांग बच्चे समाज का सबसे संवेदनशील हिस्सा हैं। ये बच्चे अपनी बात खुलकर नहीं कह पाते, इसलिए इनके साथ होने वाली आक्रामकता अक्सर छिप जाती है। 4 जून हमें याद दिलाता है कि हर बच्चे को डर-मुक्त बचपन देना हमारा कर्तव्य है। मारना, डांटना, तुलना करना या नजरअंदाज करना - ये सब आक्रामकता के ही रूप हैं।" 
उन्होंने आगे जोड़ा कि प्रांजल स्कूल का मकसद सिर्फ पढ़ाना नहीं, बल्कि बच्चों को 'सुरक्षित और स्वाभिमानी' बनाना है।
विशेष शिक्षक प्रांजल ने दिलाया संकल्प   
विशेष शिक्षक प्रांजल ने बच्चों को बहुत सरल तरीके से 'अच्छा स्पर्श-बुरा स्पर्श', 'ना कहना सीखो' और 'विश्वास वाले व्यक्ति को बताओ' जैसे विषयों पर गतिविधि के माध्यम से समझाया। दृष्टिबाधित, मूक-बधिर और मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों के लिए ब्रेल शीट, चित्र कार्ड और कठपुतली का प्रयोग किया गया।

बच्चों ने "हमें प्यार चाहिए, मार नहीं", "चुप नहीं रहेंगे, बात बताएंगे" जैसे नारे लगाकर संकल्प लिया। 

गतिविधियां रहीं खास  
हाथों का पेड़ सभी बच्चों ने रंगीन कागज पर अपने हाथ की छाप लगाकर 'सुरक्षा का पेड़' बनाया और शपथ ली कि वे किसी को चोट नहीं पहुँचाएंगे।
नुक्कड़ नाटक विशेष शिक्षकों ने 'चुप्पी तोड़ो' शीर्षक से नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया, जिसमें बताया गया कि डरने की जगह अपनी बात शिक्षक या माता-पिता को बताना जरूरी है।

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 19 अगस्त 1982 को प्रतिवर्ष 4 जून को 'आक्रामकता के शिकार हुए मासूम बच्चों का अंतरराष्ट्रीय दिवस' के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य युद्ध, शारीरिक-मानसिक शोषण और तस्करी से पीड़ित बच्चों के दर्द को दुनिया के सामने लाना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
कार्यक्रम के अंत में सभी बच्चों को 
मिठाई खिलाकर उनकी खुशी ध्यान में रखते उनके मन पसंद चिप्स भी खिलाए ।

Likesh khunte

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