जीवन जीने की कला*क्षणिक सुख मे न भटके!


*जीवन जीने की कला क्षणिक सुख मे न भटके 
जीवन तब बेहद सुंदर हो जाता है जब आप अपने लिए इस जीवन का कोई उद्देश्य बना लेते हैं. वैसे लोग जिनके जीवन में कोई उद्देश्य नहीं होता उनका जीवन किसी खास बड़ी उपलब्धि तक नहीं पहुंचता. आप क्यों आए हैं: आप यहां इस धरती पर क्यों है; क्या करना है इस जीवन का कैसे बिताना है; सिर्फ, जीना है या कुछ बड़ा, अर्थपूर्ण हासिल करना है? एक व्यक्ति जो उद्देश्य से वंचित रहता है, वह सुखों के साथ भटकता है. छोटी छोटी खुशियां उसको भटकातीं हैं. सबसे पहली बात जो आपको समझ लेनी चाहिए कि उद्देश्य सुखों से महत्वपूर्ण है. जब हम उद्देश्य या दिशा से वंचित होते हैं, तो हम अक्सर सुखों के साथ भटकने लगते हैं. लेकिन सच्ची संतुष्टि उद्देश्यपूर्ण जीवन से मिलती है. अपने उद्देश्य की खोज करें और अपने कार्यों को उसके साथ जोड़ें. आपको दूसरी बात ये समझनी चाहिए कि भटकना आपके विकास में बाधा है. सुखों के साथ भटकना एक टेंपरेरी एस्केप हो सकता है, लेकिन यह व्यक्तिगत विकास और प्रगति में बाधा डालता है. उन पैटर्न को पहचानने की कोशिश कीजिए जब आप भटकने के तरीकों का उपयोग मुख्य कार्यों से बचने के लिए करते हैं और फिर उसका समाधान खोजिए. आत्म-अवलोकन, सीखने और आत्म-सुधार पर ध्यान दीजिए. एक समझदार इंसान ये जानता है कि अर्थपूर्णता क्षणिक सुख से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है. छोटी छोटी क्षणिक सुख देने वाली चीजें आपको बस कुछ क्षण के लिए अच्छा महसूस करा सकती हैं, लेकिन ये आपको अंतिम संतुष्टि कभी नहीं दे सकतीं. जो कार्य अर्थपूर्ण हैं सिर्फ वही कार्य आपको सही मायने में आनंदित कर सकते हैं. उनमें निवेश करें. अर्थपूर्ण संबंध बनाएं: व्यक्तिगत विकास पर ध्यान दें, कुछ महत्वपूर्ण चीजों का निर्माण करें: चुनौतियों का सामना करें. उद्देश्य और अर्थपूर्णता को प्राथमिकता देते हुए, आप गहरी संतुष्टि और एक अधिक संतुष्ट जीवन

का निर्माण कर पाएंगे. उन क्षेत्रों की
पहचान करें जहां आप सुखों के साथ भटक रहे हैं. एक बात समझिए आप अपने मूल्यों और जुनून को खोजकर अपना उद्देश्य निर्मित कर सकते हैं. एक बार उद्देश्य तय हो जाए तो अपने उद्देश्यों के साथ मिलने जुलने वाले कार्यों की एक योजना बनाइए और बिना भटके काम पर लगे रहने के लिए आत्म-चेतना विकसित कीजिए ताकि आप क्षणिक सुख में भटकने की पहचान कर सकें. अब एक बात जो सबसे ज्यादा जरूरी है वो है उन लोगों के साथ रहना जो आपके विकास और उद्देश्य का समर्थन करते हैं. ऐसे लोगों के बिना यात्रा कब रुक जाए कोई नहीं जानता. आप कैसे लोगों के बीच हैं ये बहुत मायने रखता है. जब आप उत्साह बढ़ाने वाले लोगों के बीच होते हैं तो आपको चलते रहने की हिम्मत मिलती है, आप परेशानियों से घबराते नहीं है बल्कि डटकर उनका मुकाबला करते हैं. अच्छी फ्रेंड सर्कल आपके जीवन का बहुत सारा वक्त बर्बाद होने से बचा सकती है. इसलिए वहीं रहिए, उनके बीच ही, जहां विचारों की चर्चा हो, उम्मीदों की बात हो, सपनों को देखने की कोशिश हो और एक दूसरे पर भरोसा हो. जीवन गुजरते जा रहा है, इंसान होने के नाते हमें सिर्फ गुजरना नहीं चाहिए, बल्कि संवरना चाहिए और ऐसे गुजरना चाहिए कि जमाना पलट पलट के देखे कि कौन गुजरा है यहां से.
अश्वनी कुमार साहू 
 *संस्थापक* 
समृद्धि समाज सेवी संस्थान 
सोशल वर्कर / कॉउंसलर 
मास्टर ट्रैनर

Likesh khunte

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