सारंगढ़ । सारंगढ़ जिला मुख्यालय के सांस्कृतिक नगरी मां कुशलाई दाई की धरा में श्री शिव महापुराण कथा के चौथे दिन भक्तों की भीड़ रही । कथा वाचिका रूचिता तिवारी ने कथा के चौथे दिन महाशिव पुराण कथा में भोले नाथ की विवाह का कथा सुनाते हुए कथा कहीं वही भोले नाथ की विवाह का आनंद लिए । विवाह प्रसंग में शिव महापुराण में शंकर विवाह का विवरण बहुत ही रोमांचक है। जब शंकरजी विवाह करने के लिए पहुंचे, तो उनकी बारात की तैयारी बहुत ही अनोखी थी। उनके गणों ने अपने अंगों में ताजा खून लगा रखा था, और वे सभी अपनी तरंग में मस्त होकर नाचते-गाते और मौज उड़ाते हुए महादेव शंकरजी के चारों ओर एकत्रित हो गए थे।
शिवजी वृषभ पर सवार हुए, और उनकी शोभा निराली ही छटक रही थी। उनके साथ ब्रह्मा, विष्णु, और अन्य देव-रमणियाँ भी थीं। हिमाचल ने कन्यादान दिया, और विष्णु भगवान तथा अन्यान्य देव और देव-रमणियों ने नाना प्रकार के उपहार भेंट किए ।
ब्रह्माजी ने वेदोक्त रीति से विवाह करवाया, और सब लोग अमित उछाह से भरे अपने-अपने स्थानों को लौट गए। इस प्रकार हर-गौरी का विवाह आनंदपूर्वक संपन्न हुआ । कथा के चौथे दिन कोसीर अंचल के जनपद सदस्य श्रीमती हीरा भैरव नाथ जाटवर , विष्णु चंद्रा , लाल बहादुर चंद्रा,
मिट्ठू लाल अग्रवाल,जनपद प्रतिनिधि भैरव नाथ जाटवर ,कथा के जजमान शंभु राव , श्याम कुमार पटेल,अशोक कुमार आदित्य, किशन चंद्रा, किशन यादव ,उपस्थित रहे वही जनपद सदस्य श्रीमती हीरा भैरव नाथ ने संबोधित करते हुए अंचल के लिए मंगलमनाएं की कामना किए ।आरती कार्यक्रम में गांव के माता बहने शामिल होकर कथा का आनंद लिए ।