अमोरा में धूमधाम से संपन्न हुआ गौरी रानी का विसर्जन!!

अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट 
जांजगीर चाम्पा – जाज्वल्य नगरी जिला मुख्यालय के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत आने वाले माँ शँवरीन दाई की पावन धरा ग्राम अमोरा (महंत) में आज गौरी रानी का महापर्व बड़े हर्षोल्लास एवं धूमधाम के साथ मनाया गया। भक्तों द्वारा मांदर की थापों के बीच कई तरह के बाजे गाजे के साथ झांकियांँ निकालकर गाँव के सागर तालाब में विसर्जन किया गया। गौरतलब है कि अनादि काल से अमोरा गांँव में नवरात्रि के प्रथम दिन से ही गौरी रानी स्थापित करने की परंपरा चली आ रही है , जहां प्रतिवर्ष बड़े हर्षोल्लास एवं धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इसी कड़ी में इस वर्ष भी नवरात्रि प्रतिपदा के दिन से यहांँ लगभग इंक्यावन जोड़ी शिव पार्वती के प्रतीक गौरी रानी स्थापित की गयी थी। जिसकी प्रतिष्ठा कर ग्यारह दिनों तक विधि विधान से पूजा अर्चना कर विभिन्न प्रकार के बाजे गाजे के साथ कुँवारी कन्याओं द्वारा गौरी रानी को सिर में धारण कर युवाओं द्वारा अस्त्र शस्त्रों का संचालन करते हुये झांकी निकालकर सागर तालाब में महाआरती के बाद विसर्जन किया गया। इस झांकी में बंदर , भालू एवं नृत्यांगनाओं के रूप में नाट्य कलाकार भी आकर्षण के केन्द्र रहे। पूरे गांव में शाम पांच बजे से रात ग्यारह बजे तक मेला लगा हुआ था। इस महापर्व के संबंध में जानकारी देते हुये गाँव के निवासी एवं कामधेनु सेना के छत्तीसगढ़ सचिव योगेश तिवारी एवं अंतर्राष्ट्रीय चैम्पियनशिप बेल्ट विजेता रेसलर प्रतीक तिवारी ने अरविन्द तिवारी को बताया कि ”गौरी रानी” महापर्व इस गाँव का बहुत प्रसिद्ध महापर्व है जो पूरे जिले में एक ही जगह होता है , इसलिये बहुत दूर दराज के लोग भी यहाँ ये पर्व देखने आते हैं । गौरी रानी (उमा महेश्वर) की स्थापना – पूजन व विवाह करने से सुख , शांति , समृद्धि मिलती है और व्यक्ति की समस्त मनोकामना पूर्ण होती है। इसी कारण से गांव में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। गौरी रानी का यह महापर्व चूकि जिले के एकमात्र ग्राम अमोरा में ही मनाया जाता है। इसलिये जिले भर श्रद्धालु और दर्शकगण भारी संख्या में यहांँ पहुंँचकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाते हुये गाँव में लगे मेला का भी आनंद उठाते नजर आये। यहाँ के जो भी लोग बाहर में सेना या अन्य विभाग में नौकरी करते हैं वे भी इसी समय छुट्टी लेकर आते हैं और गाँव की बेटियाँ भी इसी समय आती हैं। इस गाँव में सैकड़ों वर्ष पहले हमारे पूर्वजों द्वारा अपने बच्चों की शादी विवाह एवं अन्य मनोकामनाओं के साथ गौरी रानी स्थापित की गयी थी। इनकी स्थापना से उनकी मनोकामनायें पूरी हुई , तब से लेकर आज तक यह परंपरा अनवरत जारी है और आगे भी चलती रहेगी। इनकी पूजा आराधना से सुख , शांति एवं समृद्धि मिलती है सभी मनोकामनायें पूरी होती है। गौरी रानी महापर्व के इस भव्य कार्यक्रम में कई अधिकारी , मीडियाकर्मी सहित श्रद्धालुओं ने पहुंचकर भगवान से आशीर्वाद प्राप्त किया और क्षेत्रवासियों के खुशहाली की कामना की। इस पूरे कार्यक्रम में शांति व्यवस्था बनाये रखने में नवागढ़ थाना प्रभारी निरीक्षक अशोक वैष्णव सहित पूरे नवागढ़ स्टाफ , महिला सेल , पुलिस मुख्यालय जांजगीर का सराहनीय योगदान रहा।
क्या है गौरी रानी महापर्व

गौरतलब है कि इस गाँव में तिवारी परिवार की बाहुल्यता है और इसके पूर्वजों ने आज से लगभग डेढ़ सौ साल पहले अपनी मनोकामना को लेकर गौरी रानी स्थापित कर ग्यारह दिन तक उनकी पूजापाठ किये जिससे उनकी मनोकामना पूरी हो गयी। तब से लेकर आज तक प्रत्येक क्वाँर नवरात्रि के शुरू दिन से ही इस गाँव में ”गौरी रानी” की स्थापना की जाती है और एकादशी के दिन बड़े हर्षोल्लास के साथ इनको विसर्जित की जाती है। इसकी यह भी मान्यता है कि ”गौरी रानी” को किसी भी जाति वर्ग के केवल कुँवारी लड़कियाँ ही अपने सिर पर धारण करती हैं सबसे पहले कलश होता है ,उसके बाद पार्वती, उसके बाद शंकरजी फिर पूजापाठ में उपयोग किया गया फूलपान का टोकरी और बाजे गाजे के साथ पूरे गाँव में घुमाया जाता है। गांव के हर चौराहे पर युवाओं द्वारा शौर्य प्रदर्शन एवं करतब का प्रदर्शन भी किया जाता है और अंत में महाआरती के पश्चात सागर तालाब में गौरी रानी विसर्जित की जाती है।

Likesh khunte

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