भारत रत्न से सम्मानित होंगे लालकृष्ण आडवाणी
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
नई दिल्ली - केंद्र सरकार ने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित करने की घोषणा की है। पीएम नरेंद्र मोदी ने आडवाणी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' दिये जाने पर खुशी जाहिर करते हुये कहा मुझे यह बताते हुये बहुत खुशी हो रही है कि लालकृष्ण आडवाणीजी को भारत रत्न से सम्मानित किया जायेगा। मैंने भी उनसे बात की और इस सम्मान से सम्मानित होने पर उन्हें बधाई दी। वे हमारे समय के सबसे सम्मानित राजनेताओं में से एक हैं और भारत के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय है। पीएम ने कहा कि लालकृष्ण आडवाणी का जीवन जमीनी स्तर पर काम करने से शुरू होकर उपप्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा करने तक का है। उन्होंने हमारे गृहमंत्री और सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में भी अपनी पहचान बनायी। उनके संसदीय काम हमेशा अनुकरणीय और समृद्ध अंतर्दृष्टि से भरे रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि जनता की सेवा में आडवाणी की पारदर्शिता हमेशा याद रहेगी। आडवाणी ने राजनीतिक नैतिकता में एक अनुकरणीय मानक स्थापित किया है। उन्होंने राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान को आगे बढ़ाने की दिशा में अद्वितीय प्रयास किये हैं। पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाना मेरे लिये बहुत भावुक क्षण है। मैं इसे हमेशा अपना सौभाग्य मानूंगा कि मुझे उनके साथ बातचीत करने और उनसे सीखने अनगिनत अवसर मिले।
मेरा जीवन मेरे राष्ट्र के लिये है - आडवाणी
भारत रत्न मिलने पर लालकृष्ण आडवाणी ने कहा - मैं अत्यंत विनम्रता और कृतज्ञता के साथ भारत रत्न स्वीकार करता हूं , जो आज मुझे प्रदान किया गया है। यह ना सिर्फ एक व्यक्ति के रूप में मेरे लिये सम्मान की बात है , बल्कि उन आदर्शों और सिद्धांतों के लिये भी सम्मान है , जिनकी मैंने अपनी पूरी क्षमता से जीवन भर सेवा करने की कोशिश की। आडवाणी ने कहा - मैं चौदह साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक के रूप में शामिल हुआ , तब से मैंने केवल एक ही कामना की है। जीवन में मुझे जो भी कार्य सौंपा गया है , उसमें अपने देश की समर्पित और निस्वार्थ सेवा की। जिस चीज ने मेरे जीवन को प्रेरित किया है वह आदर्श वाक्य है 'इदं न मम' ─ 'यह जीवन मेरा नहीं है , मेरा जीवन मेरे राष्ट्र के लिये है। उन्होंने कहा आज मैं उन दो व्यक्तियों को कृतज्ञतापूर्वक याद करता हूं जिनके साथ मुझे करीब से काम करने का सम्मान मिला - पंडित दीनदयाल उपाध्याय और भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी।आडवाणी ने सम्मान के लिये राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पीएम मोदी को भी धन्यवाद दिया। साथ ही भाजपा संघ और दिवंगत पत्नी कमला आडवाणी को भी याद किया।
गौरतलब है कि लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 08 नवंबर 1927 को कराची (अब पाकिस्तान) में हुआ था , लेकिन वे आजादी के बाद भारत आ गये। वे भाजपा के फाउंडर मेंबर्स में शामिल हैं। इनके राजनीतिक केरियर की शुरुआत वर्ष 1942 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता के रूप में हुई थी। यहां से उन्होंने देश के उपप्रधानमंत्री तक का सफर तय किया। वर्ष 1970 से 1972 तक वे जनसंघ इकाई के अध्यक्ष थे। लालकृष्ण आडवाणी कई बार लोकसभा और राज्यसभा से सांसद के अलावा तीन बार भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष भी रहे चुके हैं। लालकृष्ण आडवाणी पार्टी के एकमात्र ऐसे नेता रहे हैं जो वर्ष 1980 में भारतीय जनता पार्टी के गठन के बाद से ही सबसे ज्यादा समय तक पार्टी में अध्यक्ष पद पर बने रहे हैं। पहली बार वे वर्ष 1986 से 1990 तक अध्यक्ष रहे और उसके बाद वर्ष 1993 से 1998 और फिर वर्ष 2004 से 2005 तक पार्टी अध्यक्ष रहे। बतौर सांसद तीन दशक की लम्बी पारी खेलने के बाद आडवाणी पहले गृहमंत्री रहे , बाद में वे अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वर्ष 2004 तक देश के उपप्रधानमंत्री भी रहे हैं। वर्ष 2015 में इन्हें पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया था। अब उन्हें भारत रत्न दिया जा रहा है। बताते चलें भारत रत्न भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है। यह सम्मान 02 जनवरी 1954 को स्थापित किया गया था। तब से यह 'मानव प्रयास के किसी भी क्षेत्र' कला , साहित्य , विज्ञान , समाज सेवा और खेल के क्षेत्र में देश के लिये असाधारण योगदान देने वाले लोगों को दिया जाता है। भारत रत्न के लिये सिफारिशें प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रपति को की जाती हैं। इसमें प्रति वर्ष अधिकतम तीन व्यक्तियों को पुरस्कार देने का प्रावधान है। सम्मानित व्यक्ति को राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित एक सनद (सर्टिफिकेट) और एक पीपल के पत्ते के आकार का पदक मिलता है। आजाद भारत के पहले गवर्नर-जनरल और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री सी राजगोपालाचारी , दूसरे राष्ट्रपति और भारत के पहले उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन और नोबेल पुरस्कार विजेता और भौतिक वैज्ञानिक सीवी रमन को 1954 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। उस समय देश के राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। तब से लेकर अब तक पचास व्यक्तियों को यह सम्मान मिल चुका है। शुरुआत में यह सिर्फ जीवित व्यक्तियों के लिये था , लेकिन वर्ष 1955 में नियमों में सुधार किया गया।